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महाशिवरात्रि: त्रिशूल, चंद्र और सूर्य के दिव्य शृंगार में सजे बाबा महाकाल, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

 


नई दिल्ली।  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बाबा महाकालेश्वर मंदिर शिवभक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर दिखाई दिया। ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का सैलाब रात से ही दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गईं, वहीं मंदिर प्रशासन ने सुव्यवस्थित एवं सुलभ दर्शन सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, महाशिवरात्रि के इस महापर्व पर दस लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच सकते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा है।

इस अवसर पर बाबा महाकाल को दूल्हे के रूप में अलौकिक और दुर्लभ शृंगार में सजाया गया। माथे पर त्रिशूल और चंद्रमा को अर्पित करते हुए किया गया यह विशेष शृंगार वर्ष में केवल एक बार ही संपन्न होता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह शृंगार शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और शिवत्व के सौम्य-उग्र संतुलन का प्रतीक माना जाता है। महाशिवरात्रि की इस आध्यात्मिक रात्रि में उज्जैन नगरी श्रद्धा, साधना और शिवमय चेतना का जीवंत प्रतीक बन गई है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर एक पुजारी ने बताया कि “बाबा महाकाल के प्रांगण में शिव नवरात्रि और महाशिवरात्रि का उत्सव अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। लगातार 44 घंटे तक बाबा का दरबार भक्तों के लिए खुला रहेगा और भव्य तरीके से बाबा की भस्म आरती की गई है। भक्त आज बाबा पर दूध, दही और जल अर्पित कर सकते हैं और पूरे दिन बाबा का कपाट बंद नहीं होंगे और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।”

उन्होंने आगे बताया, महाशिवरात्रि पर बाबा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त आए हैं और पूरी सुरक्षा के साथ भक्तों को कतार के साथ बारी-बारी से दर्शन कराए जा रहे हैं। मंदिर में भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में बहुत ज्यादा है। भक्त रात से ही लाइनों में लगे हैं और अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं।

आज के बाबा के विशेष अनुष्ठान को लेकर पुजारी ने कहा, “दूध, दही, और गंगाजल से बाबा का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया है और फलों के रस से भी स्नान कराया गया है। भांग से बाबा का विशेष शृंगार हुआ है और उनके माथे पर सेहरानुमा मुकुट और माथे पर त्रिशूल, चांद, और सूरज को अर्पित किया गया है। ये प्रतीक है कि दिन और रात सब कुछ उन्हीं का है, जिसके बाद बाबा का होल्कर का अभिषेक होगा। शाम के समय बाबा की विशेष पूजा होगी जो अगले दिन प्रात: काल तक चलेगी और बाबा को प्रकृति सेहरा अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही 16 फरवरी को भस्म आरती 12 बजे की जाएगी और ऐसा साल में एक बार ही किया जाता है।”

मंदिर प्रशासन की माने तो 15 फरवरी और 16 फरवरी को मंदिर में 10 लाख से ज्यादा भक्त दर्शन के लिए आ सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल से लेकर सुलभ दर्शन की तैयारी हो चुकी है। ट्रैफिक भी डायवर्ट किया गया है और परिसर के अंदर से लेकर बाहर तक पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ा दी है।

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