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राज्य सरकार ने वाहन पात्रता-खरीदी मामले में अधिकारियों पर कसी नकेल...


रायपुर। राज्य सरकार के वित्त विभाग ने सरकारी अफसरों के लिए वाहन की पात्रता और खरीदी के मामले में नकेल कसी है। सरकार के ताजा आदेश के मुताबिक अब सचिव या सचिव से उच्च स्तर के अधिकारी, जिला न्यायाधीश, जिला कलेक्टर के लिए 12 लाख तक की गाड़ी ही खरीदी जा सकेगी। इसके साथ ही अब सरकारी अधिकारियों पर अपने कार्य क्षेत्र के बाहर वाहन ले जाने पर प्रतिबंध होगा। अधिकारियों की गाड़ियों के लिए पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय की गई है।

एसपी स्तर के अधिकारियों के राज्य सरकार के वित्त विभाग ने यह आदेश शासन के समस्त विभाग, राजस्व मंडल बिलासपुर, सभी विभागाध्यक्ष, सभी संभागायुक्त, सभी कलेक्टरों को जारी किया है। राज्य शासन ने शासकीय वाहनों की पात्रता एवं खरीदी के मामले में पूर्व में जारी सभी निर्देश को बदलते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। ये भी साफ किया गया है कि विभाग, कार्यालय में शासकीय वाहनों की उपलब्धता के आधार पर शासकीय वाहन की पात्रता होगी। खास बात ये है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारी के वेतन से वसूली तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

12 लाख से अधिक की गाड़ी नहीं खरीद सकते

वित्त विभाग ने वाहन उपयोग करने वाले प्राधिकारी के आधार पर नए वाहन खरीदने के लिए वित्तीय सीमा तय की है। सरकार ने साफ किया है कि सचिव, सचिव से उच्च स्तर के अधिकारी, जिला न्यायाधीश, जिला कलेक्टर, एवं पुलिस अधीक्षक के उपयोग के लिए 12 लाख तक की गाड़ी खरीदी जा सकती है। मंत्रालय एवं विभागाध्यक्ष कार्यालय में पदस्थ संयुक्त संचालक एवं उच्च स्तर के अधिकारी के लिए साढ़े 8 लाख तक की, मैदानी कार्यालयों के अधिकारियों एव पुल वाहन के लिए 10 लाख तक की सीमा एवं आवश्यकता को देखते हुए यूटिलिटी व्हीकल, एसयूवी टाइप की वाहनों के लिए 10 लाख की सीमा होगी।

बिना काम के गाड़ी का उपयोग नहीं

वित्त विभाग ने ये कहा है कि, शासकीय अधिकारियों द्वारा कार्य क्षेत्र के बाहर शासकीय वाहन को ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। विशेष परिस्थितियों में यह प्रतिबंध विभागाध्यक्ष द्वारा ही शिथिल किया जा सकेगा। वाहनों का मुख्यायलय एवं मुख्यालय के बाहर यात्रा करने पर प्रति लीटर औसत दूरी तय करने निर्धारण अधीक्षक स्टेट गैरेज द्वारा किया जाएगा। स्टेट गैरेज द्वारा निर्धारित औसत से अधिक पेट्रोल-डीजल का भुगतान नहीं हो रहा है, यह सुनिश्चित करने का दायित्व कार्यालय प्रमुख का होगा। यह आदेश शासन के सभी सार्वजनिक उपक्रम, निगम, मंडल, आयोग, विश्व विद्यालय एवं स्थानीय निकायों पर भी लागू होगा।

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