नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीमद विजय रत्न सुंदर सूरीश्वरजी महाराज की 500वीं किताब के विमोचन के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को एक वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने स्वामी जी के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए उन्हें शांत, सरल और स्पष्ट स्वभाव का संगम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराज ने ज्ञान को केवल किताबों तक सीमित न रखकर, व्यावहारिक रूप से जीवन में उतारा।
एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज हम सभी श्रीमद् विजयरत्न सुन्दर सुरिश्वरजी महाराज साहब की 500वीं पुस्तक के विमोचन के पुण्य भागी बन रहे हैं। महाराज साहब ने ज्ञान को सिर्फ ग्रंथों तक सीमित नहीं रखा है बल्कि उसे जीवन में उतार कर दिखाया है और दूसरों को भी जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया है। उनका व्यक्तित्व संयम, सरलता और स्पष्टता का अद्भुत संगम है।”
उन्होंने कहा कि महाराज साहब की 500 रचनाएं एक ऐसा विशाल सागर है, जिसमें भांति-भांति के विचार रत्न समाहित हैं। इन पुस्तकों में मानवता की तमाम समस्याओं के सहज और आध्यात्मिक समाधान उपलब्ध हैं। समय और परिस्थितियों के अनुसार, जब किसी को जैसा मार्गदर्शन चाहिए, ये अलग-अलग ग्रंथ उसके लिए प्रकाश पुंज का काम करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि “प्रेम नु विश्व, विश्व नो प्रेम” नाम की किताब सिर्फ एक किताब नहीं है, बल्कि एक “मंत्र” है जो हमें प्यार की ताकत के बारे में बताता है और शांति और सद्भाव का रास्ता दिखाता है।” उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया बंटवारे और झगड़ों का सामना कर रही है, तो ‘प्रेम नु विश्व, विश्व नो प्रेम’ सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि एक मंत्र बन जाता है। यह मंत्र हमें प्यार की ताकत के बारे में बताता है। यह मंत्र हमें शांति और सद्भाव का रास्ता भी दिखाता है, जिसकी दुनिया आज तलाश कर रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि आप सबको याद होगा कि मैं नवकार महामंत्र दिवस पर भी आया था। उस ऐतिहासिक अवसर पर मैंने 9 आग्रह किए थे और 9 संकल्पों की बात की थी। आज का यह अवसर उन्हें फिर से दोहराने का है। पानी बचाने का संकल्प, एक पेड़ मां के नाम, स्वच्छता का मिशन, वोकल फॉर लोकल, देश दर्शन, नैचुरल फार्मिंग को अपनाना, हेल्थी लाइफ स्टाइल को अपनाना, योग और खेल को जीवन में लाना और गरीबों की सहायता का संकल्प ।


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